सूरए यूनुस की आयत क्रमांक तीसरी का अनुवादः
निश्चित रूप से तुम्हारा पालनहार वही ईश्वर है जिसने छह दिनों में आकाशों और धरती की सृष्टि की फिर उसने अर्श अर्थात आकाशों के सिंहासन पर अपना शासन स्थापित किया। वही ब्रह्मांण के समस्त कार्यों की युक्ति करता है, उसके अतिरिक्त कोई सिफ़ारिश करने वाला नहीं है, सिवाय इसके कि वही इसकी आज्ञा दे। वही ईश्वर तुम्हारा पालनहार है अतः उसी की उपासना करो। क्या तुम्हें होश नहीं आता?
संक्षिप्त टिप्पणी:
चूंकि अनेकेश्वरवादी ईश्वर को सृष्टिकर्ता तो मानते हैं किन्तु इस संसार को चलाने में उसके लिए समकक्ष ठहराते हैं, अतः आगे चलकर आयत कहती है कि सृष्टि का संचालन ईश्वर के हाथ में है और सारे काम उसके ही आदेश से होते हैं और कोई भी वस्तु संसार के संचालन में माध्यम नहीं बन सकती सिवाय इसके कि ईश्वर इसकी अनुमति दे जैसा कि ईश्वर की इच्छा और आदेश से फ़रिशते विभिन्न कामों का संचालन करते हैं या ईश्वर के प्रिय बंदों को उसके आदेश से सृष्टि में हस्तक्षेप की अनुमति होती है।
इस आयत से मिलने वाले पाठ:
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संसार की रचना पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अंतर्गत हुई है ये कोई संयोग नहीं है।
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सृष्टि का एक निश्चित लक्ष्य और क़ानून है क्योंकि इसका रचयिता और संचालक एक व अनन्य है।